अब हमें दुआ नहीं दवा चाहिए
जीने के लिए खुबसुरत हवा चाहिए।
तन्हाई में हर रोज़ बढती जा रही मर्ज मेरी
कोई न कोई अब तो हमनवा चाहिए।
इश्क के हाथों बिक जाए ये पुरा बदन
खरीदार भी वैसा ही दिल जवां चाहिए।
चलती इन सांसों से थम जाने की बू आती है
आरजू जनाजे में मेरे कारवां चाहिए।
©anuragrahi
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