अब हर गली मुहल्ले में अमन का इश्तहार हो
नए साल में बस बहार ही बहार हो।
न कोई इश्क रूठे और न अब कोई दिल टुटे
खुले दिल से गिले शिकवे का इजहार हो।
प्यार एक जज्बात है महसूस करे ये दुनिया
अब न किसी के जज्बातों का कभी व्यपार हो।
ये सच है हर कश्ती आ साहिल पे नहीं लगती
दुआ है रब से कोई कश्ती न फंसी मझधार हो।
हमने तो कर ली है तर्क-ए-त'अल्लुक इश्क से
अनुराग अब न हमें किसी बेवफ़ा का इंतजार हो।
©anuragrahi
S