जिसके होने से ही जहन में सांस रुकती थी कभी,
उसे भूल जाना ही, अब जरूरी सा लगता है,
दुआ में साथ मांगने की जुर्रत अब नहीं करना है,
जिसका, मुझे छोड़ देना ही, अब जरूरी सा लगता है,
की ख्वाब ना आए उसके, अब सोने से डरती हुँ,
की उम्र भर जगना, अब जरूरी सा लगता है,
वो मेरी आदतों में शामिल, मेरी ज़िन्दगी हो गया है,
की ऐसी आदतें छोड़ देना, अब जरूरी सा लगता है..!!
©priya_vish
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