अब मुहब्बत से मुलाकात हो,
नए जिन्दगी की शुरुआत हो।
बहुत गुजारी हमने हिज्र-ए-जिन्दगी,
अब लबों पर बस प्यार की सौगात हो।
ये उदासी ये तन्हाई से मलीन जिन्दगी,
टुट जाएगी गर अब तेरा न साथ हो।
रूठना भी मेरा अब रूठना न रहा,
जब तलक से तुम न मेरे पास हो।
मेरी धडककनें तेरी सलामती की सजदा करती है,
तुम्हें भी मेरे दर्द-ए-जिगर का अहसास हो।
अब मुहब्बत से मुलाकात हो,
नए जिन्दगी की शुरुआत हो।
©anuragrahi
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