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अब रिहा करो

अब रिहा करो हमें तुम्हारी यादों से
बुला क्यों नहीं लेते इन्हें वापस किसी बहाने से
कब तक चलतीं रहेंगी साथ मेरे
रोकती रहेंगी किसी और से दिल लगाने से
तुम तो ना वफ़ा, ना जफ़ा चाहते हो हमारी
हम कब तक भागते फिरेंगे, जमाने से
©Arpita Rai