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अब तो...

अब तो दर्द में भी मजा आने लगा है
जीवन मेरा एक सजा लगने लगा है
खुशियां कहां टिकती है दर पर मेरे
दर्द का कोहरा घना छाने लगा है
तमन्नाओं ने छोड दी है कुलांचे मारनी
मुकद्दर भी अब तो साथ छोडने लगा है
राहों में भटकते हैं न मंजिल है न कारवां
एक- एक कर साथी सब बिछडने लगा है
बदलता मौसम भी देता नहीं राहत मुझको
बहारों का मौसम भी अब चिढाने लगा है
तेरा साथ था ..खुशियां बरसती थी दर पे
अब तो आलमे दर्द हीं दर्द पिरोने लगा है
यही है मेरी किसमत या खुदा ! इकरार मुझे
तेरी हस्ती के आगे अब ये सर झुकने लगा है
©abhidilse