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अब तो मेरे सनम मुझे अपना बना लो ।

अब तो मेरे सनम मुझे अपना बना लो
मेरे खातिर दिल को अपने एकबार मना लो।
क्या है प्यार से बढ़कर इस कायनात में
प्यार करना जरा खुद को सिखा लो।
ये जात-पात हिन्दू-मुस्लिम करना जायज नहीं
इन्सानियत को ही फकत मजहब बना लो।
तेरा खुउन खुन मेरा खुन पानी ऐसा गर है तो
मेरे जिस्म में भी अपना खुन दौड़ा लो।
मैने गिराया है अक्सर नफरतों का दिवार
अपने दिल से सभी गलतफहमियां हटा लो।
रमजान गए ईद गए गई बकरीद देखा न दयारे यार
किसी बहाने तो एकबार हमें बुला लो।
कब तक होगी गुफ्तगू यूं हमारी छुप के छुपा के
मेरा मानो चलो अब निकाह मना लो।
नाम में क्या है मैं अनुराग तू नाजिया ही रहना
दो धर्मों के संस्कारों का अब लुत्फ उठा लो।
गर ये भी मंजूर नहीं तो मैं हूं हुजूर हाजिर
जो चाहो बना दो मगर अपना बना लो।
©anuragrahi