अब तुम कुछ कहो जरा नजरें उठाकर
देखने दो हमें चांद सी सूरत जुल्फें हटाकर।
मेरा बस चले गर तो ये परदा हटा दूं
फासले जो तेरे मेरे बिच है पल भर में मिटा दूं
जाओ न अब कहीं मुझसे नजरें चुराकर
अब तुम कुछ कहो जरा नजरें उठाकर ।
उलफत जो मेरे लिए तेरे तहेदिल में है
ब्यां कर रहा ये रौशन तेरी महफिल है
तुम अगर लायी हो मुझे मेहमां बनाकर
अब तुम कुछ कहो जरा नजरें उठाकर ।
आज मौसम फिजा का कुछ बदला सा है
रोशनी है मगर फिर भी धुंधला सा है
गम ए दिल की बुझाओ नई शमां जलाकर
अब तुम कुछ कहो जरा नजरें उठाकर ।
देखने दो हमें चांद सी सूरत जुल्फें हटाकर ।
©anuragrahi
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