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अभी आस्मां में उड़ रहा एक परिंदा जिंदा है ।

अभी आस्मां में उड़ रहा एक परिंदा जिंदा है
कभी मायुस मत होना तेरा आशिक जिंदा है।
खाके लाख सिने में तीर माना ये जख्म गहरा है
अभी मौत नहीं है आई तेरा बिमार जिंदा है।
तेरी उलफत के ख़ातिर ही जंग जिंदगी से लड़ रहा हूं मैं
खुदा का शुक्र है मुझपे कि मेरे अभी तक ख्वाब जिंदा है।
ये फुरकत ये जुदाई और ये तन्हाई सब मेरे ही हिस्से है
मैं हूं तभी तक तो ये सब लफ्जों का आसार जिंदा है।
ये मरना क्या फकत बदलना है एक नया पैरहन
होती है दफन जिस्म पर रहता सदियों तक नाम जिंदा है।
कभी नकाब में ही आकर सही जरा गुफ्तगू कर लो
बस तेरे एक झलक के लिए ही ये इन्सां अनुराग जिंदा है।
©anuragrahi