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अभी बांकी है

जिन्दगी तो शुरु हो चुकी है मगर जीना अभी बांकी है
जो दिन गुजर चुके हैं कुछ बुरे भी थे उनमे
मगर उन्हें भुलाकर आगे बढ़ना अभी बांकी है
कुछ ख्वाब सुनहरे देख चुकी हूँ
मगर उन्हें हकीकत में बदलना अभी बांकी है
कितने रंग है दुनिया में ये याद है मुझे
मगर उन्हें देखकर पहचानना अभी बांकी है
हिम्मत तो बहुत है कुछ कर दिखाने की और ईश्वर ने मौके भी बहुत दिये हैं
मगर उस मौके का सही फायदा उठाना अभी बांकी है
शान से तो जी ही रही हूँ किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है मुझे
मगर अपनी शान से जीना अभी बांकी है
लिख तो बहुत कुछ रही हूँ अपनी डायरी में
मगर सुनहरे पन्नों पर अपनी जिन्दगी लिखना अभी बांकी है
©gauran