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अभिमान कर लिया

जब भी करना चाहा बेदर्द तकदीर ने हम पर वार
किसी मासूम बालक सा खुद को नादान कर लिया
हटाता गया मालिक उसकी राह से हर कांटे को
जिस ने खुद को उसकी खातिर परेशान कर लिया
करके किसी संगदिल सनम से इश्क का इजहार
हमने ठीक ठाक चलती सांसो को तूफान कर लिया
नही बैठती माँ सरस्वती फिर उसकी जिव्हा पर
जिस जिस ने लिखने पर अभिमान कर लिया
🙏🙏🙏
©vikasgarg