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अबला शक्ति

दूर कहीं से!जैसा तुम कह दो!
ता-वक्त वहीं वैसा बन जाता हूँ!
तुम भी दुनिया मे कैसी ताक्त हो?
मै क्या से क्या बन जाता हूँ!
दूर कहीं------------
कभी धीमी सी आग सुलगने लगता हूँ!
कभी मचले सागर सा बन जाता हूँ!
तुम भी----------
कभी गुलशन सा ही महकने लगता हूँ!
कभी सूखे सुमन सा बन जाता हूँ!
तुम भी-------------
कभी औरों मे और तलाशे जाता हूँ!
कभी खुद और सा बन जाता हूँ!
तुम भी------------
ढोल सी काया मे तुम अबला शक्ति हो!
जो मै नतमसत्क सा बन जाता हूँ!
दूर कहीं से----------
©ramvir