ईश्वर का साया भीतर में इस कदर समाया...
मैं खुद को उनकी राहों पर चलने से रोक न पाया..
जाने- अनजाने में कैसा रिश्ता निभाया ,
कि हर क्षण में सांसो को मैंने उनका दीदार कराया...
बहता हूं इस दुनिया के संग,
पर भीतर को मैंने दरिया बनाया....
जिस क्षण मैंने खुद को चोटिल पाया ,
एक अद्भुत शक्ति ने मेरे रक्त मे साहस बनाया ,
खुद को बेहतर करने का प्रण मुझे दिलाया .....
मैंने खुद को जब भी अकेला पाया ,
बंद आंखों में उन्होंने खुद के होने का आभास कराया.. खुशकिस्मत हूं कि मैं उनको खोज पाया ,
क्योंकि उनका साथ तो हर व्यक्ति के भीतर है समाया..
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