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"अद्भुत संग"

पहाड़ों से मेरा रिश्ता पुराना है
लगता है इसने मुझे अपने आंचल में थामा है
मुस्कुराहट देता यही मेरा दाता है
सीमाओं को लाघंने का दिया इसने इरादा है
जब भी मेरा पग इसकी ओर जाता है
विचारों में शुद्धता का समावेश हो जाता है
सूर्य की चमक से गहराई से मिलाता है
इमारतों के खिलौनों को लाइन में जमाता है
और जीवन की सत्यता का दृश्य दिखाता है
राहो के इंतिहान से रूबरू कराता है
पर शिखर पर पहुंचने का जुनून भरता जाता है
वहां पहुंचा कर यह मेरे घाव पर मरहम लगाता है
वायु के स्पर्श से मुझे वो सहलाता है
ऐसा मधुर प्रेम जो मेरा मन इससे पाता है
कि आंखों से शब्द पन्ने में गिरता जाता है
छोटे-छोटे जीवो से हमें ये मिलाता है
उन्हें मेरा साथी बताकर
दोस्त बनाना सिखाता है
दयालुता के भाव भीतर में सजाता है
पौधों की मासूमियत का साक्षी हमें बनाता है
अंतर्मन से हमारे उन्हें वो मिलाता है
कभी-कभी उसका साथ हमें भावुक कर जाता है
और शब्दों को विराम देता, मेरा अंतर्मन कलम रखने की इजाजत चाहता है
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