अगर आपने दिल पे दस्तक न दी होती
शायद मुझे मुहब्बत न हुई होती।
आपकी एक नज़र ने है हमें जीना सिखाया
वगरना मेरे उम्र में बरकत न हुई होती।
इत्तफाक से हम आए आपके शहर-ए-दिल में
यूं तो आपसे कभी रफाकत न हुई होती।
ढक दिया है आपने मुझे लिबास-ए-इश्क़ में
बेरूखी में हमसे इशरत न हुई होती।
मौसम-ए-बहार है सावन की फुहार है
वगरना इस जिस्म में कोई हरकत न हुई होती।
©anuragrahi
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