अगर वो किसी और का था,
तो मुझे मिला ही क्यों…
अगर उसकी मंज़िल कहीं और थी,
तो मेरा रास्ता चुना ही क्यों,
अगर साथ चलना लिखा न था,
तो ख़्वाबों में आया ही क्यों।
मेरे हाथों में हाथ रखकर,
फिर ख़ामोशी से छोड़ा ही क्यों,
दिल को अपना कहने वाला,
फिर दिल तोड़ के गया ही क्यों।
शायद वो एक सवाल था,
जिसका जवाब वक़्त बन गया,
वो मेरा ना होकर भी देखो,
मेरी कहानी का हिस्सा बन गया।
अब समझ आता है धीरे-धीरे —
कुछ लोग रहने नहीं आते,
बस हमें महसूस करना सिखाकर,
यादों में कहीं खो जाते।
अगर वो किसी और का था…
तो शायद इसलिए मिला,
ताकि मैं जान सकूँ —
प्यार खोना भी, प्यार का हिस्सा होता है। 🌙
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