ऐ नारी तू बहुत महान ,
नारायणी , सीता , मीरा राधा ,
सती सावित्री तेरो अनगिनत नाम ,
शब्द भी छोटे मेरे ,
चाहे करु ,
कितना भी गुणगान ,
ममता की तू मूरत ,
रात रागनी की सूरत ,
गुलाब सी सुगंध बिखेरती ,
तेरी हर मुस्कान ,
रात रागनी सी नेह बरसाती ,
तेरे हर एहसास ,
चंदा की चांदनी जैसी ,
तेरे हर जज़्बात ,
ऐ नारी तेरे सम्मान में ,
सर झुकना लाजिमी ही हैं ,
सबको तो तुमने ही ,
इस दुनिया से परिचय कराया है ,
अपने रुप सौंदर्य के परवाह किए बगैर ,
कोख में अपने लहू से सींचा है ,
भूखे पेट रह कर भी ,
अपने दूध से भूख मिटाया है ,
माना कि पुरुष प्रधान समाज हमारा ,
हर तरफ लगा कुछ नपुंसकों का जमावड़ा है ,
लेकिन फिर भी नारी का सम्मान वहां ,
जहां मर्दों की मर्दानगी की मार्यादा है ,
पर विडम्वना तूं कुंठित हो ,
या कुछ महत्त्वकांक्षाओं ने किया बखेरा है ,
कहीं मी टू ,
कहीं सी टू का लग रहा अब तांता है ,
लगता है शायद अब ,
संस्कार खोती सृष्टि संस्कृति का ,
परचम लहराता जमाना है ।🤔
धन्यवाद 🙏
____संजय निराला ✍
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