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ऐ निराला चमन

स्पंदन करें ,
दिल की धड़कन ,
बात सुनो ,
करो दिल से मनन ,
छोड़ो भी गुस्सा ,
तोड़ो अपना भ्रम ,
ऐ भी तो तेरा ही है ,
अब तो आ ही जाओ ,
राह तके तेरा ,
ऐ निराला चमन ,
माना की अंधेरा घना है ,
हम दोनों के बीच में ,
कुछ धुंध ने डाला डेरा है ,
पर रुह कहां ,
एक दूसरे से जुदा ,
आंखें बताती तेरी ,
दिल का दरवाजा ,
तेरा अब भी खुला है ,
लेकिन काई का जर्द ,
कुछ थोड़ा पड़ा है ,
पांव फिसलते मेरे ,
जब चौखट पे पहुंचते तेरे ,
कुछ हाथ बढ़ा तू भी ,
चल साफ करते ,
दोनों मिलकर ,
ऐ तेरे मेरे का ,
जर्द जो पड़ा है ,
रुह को इससे ,
आजाद करते हैं ,
करो दिल से मनन ,
अब तो आ भी जाओ ,
राह तेरा तके ,
ऐ निराला चमन ।🤔
धन्यवाद🙏
_____संजय निराला ✍