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ऐ ज़िन्दगी तू रहती है कहाँ

ऐ ज़िन्दगी तू रहती है कहाँ
सुन कुछ लम्हें जो तेरे साथ बिताऊँ
ऐ ज़िंदगी तू कुछ मुझमें ऐसे समा
की ढल जाएं ये वक्त
ऐ ज़िंदगी तो रहती है कहाँ
ऐ ज़िन्दगी तू कुछ पलों मै ऐसे समा
की आसमान और तारे तुझमे समा जाएं
ऐ ज़िन्दगी तू रहती है कहाँ
ऐ ज़िन्दगी तू मुझमे ऐसे समा
की रात और दिन तुझमे समा जाएं
ऐ ज़िंदगी तू रहती हैकहाँ
ऐ ज़िन्दगी तू रहती है कहाँ
प्रीति
©perrti