ऐसा भी होता हैँ क्या कोई?
तुम भले ही नहीं थे पास मेरे।
पर दिल ने हमेशा तुम्हे याद किया है।।
तुम्हारा साथ ना था पास मेरे ,नहीं था हाथ तुम्हारा हाथो मे।
पर मैं जहाँ भी गई साथ तुम्हे सदा ले गई हुँ अपनी यादो मे।।
जब भी तन्हा होती थी ,तुमसे तन्हाई मे बातें करती थी।
हर राज बता देती थी तुम्हे जो किसी से ना कह पाती थी।।
मेने देखा है बहुत से लोगो को प्यार करते हुए।
पर नहीं देखा किसी को तुम जैसे प्यार निभाते हुए।।
तुम कैसे सब कुछ जान लिया करते थे।
बिन बोले मेरे दिल को पढ़ लिया करते थे।।
लोग तो देखकर जानबूझकर भी भरोसा नहीं कर पाते है।
तुमने बिन देखे बिन जाने कितना यकीन कर लिया मुझ पे।।
ऐसे भी प्यार करता है क्या कोई?
ऐसे भी प्यार निभाता है क्या कोई?
बिन कहे ,बिन सुने बस करता चला जाता है क्या कोई?
जैसे तुम हो ,वैसा भी होता है क्या कोई ?
✍️शिवन्या
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