ऐसा क्यों भगवन .....
सुबह शाम
मंदिरों की घंटियां हम बजाएं
ओम की ध्वनि मात्र से
पानी विदेशों में उड़ता जाए
लक्ष्मी कुबेर की पूजा हम करें
और डॉलर विदेश का उठता जाए
ऐसा क्यों भगवन .......
परियों की कल्पना मात्र हम करें
श्वेत परियां विदेश में पाई जाए
हम ठेके पर भी पिए
तो घर बाहर जाए धुन्ने
विदेशी चर्च में पिएं
फिर भी तू उनकी सुने
ऐसा क्यों भगवान.......
अजनबी
©shalu1234
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