भटके नहीं है रास्ता, ना अपनी मंजिल भूले हैं
ये भी ना समझना कि हम गम में डुबे है
ना किसी गैर मे इतनी ताकत, ना किसी अपने कि नियत है कि डुबो दे हमारी कश्ती
अरे राय हम तो खुद पुरा का पूरा दरिया है
अरे समंदर भी पुछता है हमारी राय
राय ऐसी है हमारी हस्ती
©Arpita Rai
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