अजब तेरे शहर का अब दस्तूर हो गए
जुर्म जिसने की वहीं बेकसूर हो गए ।
ये छुड़ियां,तलवारें और बंदुक सब धरे के धरे रहे
कत्ल करने में जालिम निगाहें मशहूर हो गए।
रंग बिरंगी कागजी फुलों से सजा दिए घरों को मगर
गेंदा गुलाब चम्पा चमेली के खुशबुओं से दूर हो गए।
लड़ते लड़ते आजादी के सच्चे दिवाने शहिद और
बचें जो मकार कोई प्रधान तो कोई हुजूर हो गए।
आपने क्यों B.A, M.A करके खोल दिया ये दुकान
वो जनाब तो बे-पढे लिखे नेता मशहूर हो गए।
साकी तेरा नशा शराब का उतर जाएगा उस दिन
अनुराग का कलाम सियासत को गर मंजूर हो गए।
©anuragrahi
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