अजनबी रास्ते भी देखा हुआ लगने लगते है
जब कोई रहगुजर दर-ए-महबूब से गुजरने लगते हैं।
भला अब क्यूं हो ज़रूरत घोड़ागाड़ी या मोटर गाड़ी की
थके पैर ही खुद-ब-खुद जब गाड़ी से तेज़ चलने लगते हैं।
हवाएं रोक दे बहना अपना रोक दे महताब चलना
आईना के सामने जब वो खुद से संवरने लगते हैं।
नमीं आंखों में जियादा सेहत के लिए ठीक नहीं
छतें दब जाती हैं जहां जहां पानी ठहरने लगते है।
नशा क्या चढ़े किसी मय का इन आंखों में दोस्तों
देखकर जोहराजबीं नशा-ए-इश्क चढने लगते हैं।
हमें जिसने थामकर उंगलियां चलना सिखाया अनुराग
थाम लो उन्हें बिन सहारे के अब वो भी फिसलने लगते हैं।
©anuragrahi
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