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अक्स-ए-ख्वाईश को जाया न करों।

अक्स-ए-ख्वाईश को जाया न करों
बताओं हमें हमसे छुपाया न करों।
तेरे होंठो के हर अदा से वाकिफ हूं मैं
ख़ुश रहो कभी चेहरा मुरझाया न करों।
हर शख्स कह देगा तुम्हीं कातिल हो
मुझे इस अंदाज से देखा न करों।
माना कि ग़म तुझे भी है जुदा होने का
आ भी जाओ ग़म बढ़ाया न करों।
इल्ज़ाम न आ जाए सफ़र में कोई
रास्ते कठिन हो मगर वहां ठहरा न करों।
कोई शाख हो या फिर कोई शिशा अनुराग
टुटने वाले हर शै पर भरोसा जताया न करों।
©anuragrahi