अल्फाजों क्या-क्या है वह तो अपना समर्थन ढूंढते हैं
जज्बातों के सहारे दिल ए मोहब्बत की राहों में ढूंढते हैं
शब्द नहीं ढूंढता मिलना बिछड़ना और बिखरने का दौर
जहां मन करता है वही मिल जाता है नजमा ए ख्वाहिश
वो कदम चल तो दिए ख्वाहिशों के मंजिल आने तक
हम रास्ता भटक जाते हैं हमसफर मंजिल आने तक
वह अल्फाजों को संभाले नहीं है तकरार ए मोहब्बत के
बस चंद लफ्जों में टूट जाती है जिंदगी तुम्हारे और मेरे
अल्फाजों में प्रेम है प्रेम है स्नेह मिलन और मोहब्बत
अल्फाजों में नफरत है विध्वंस है अलगाव और शक
@nishtha_love
©lawnishtha
L