S sgupta en July 23, 2025 अलविदा मेरी पसन्द भी ऐसी थी जो पहले से किसी की पसन्द थी । ये तो खुदा का करिश्मा है इसमें उसका क्या कसूर है । वो जहाँ भी रहे बस खुश रहे अब यही दस्तूर है ।©sandeepgup