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अलविदा

मेरी पसन्द भी ऐसी थी
जो पहले से किसी की पसन्द थी ।
ये तो खुदा का करिश्मा है
इसमें उसका क्या कसूर है ।
वो जहाँ भी रहे बस खुश रहे अब यही दस्तूर है ।
©sandeepgup