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अलविदा दोस्त।

यूंही अलविदा कह दिया इजाजत तूने क्यों नहीं लिया
हम भी चल रहे थे साथ साथ एक इशारा तक नहीं किया
मेरे सुखन में बार बार जिक्र-ए-अहद शिकन हो ग़ालिबन
तूने भी मेरा मैनें भी तेरा अभी तक कर्ज अदा नहीं किया।
ये सच खुदा है आप भी हम सब तेरे बनाए इंसान है
खुद से नियति तोड़ लिया बाखुदा फर्ज पुरा नहीं किया।
हम करे गर गफलत कोई तो कड़ी से कड़ी तू सजा दे दो
है कोई जो ये पुछ ले आप बहुत सरिफ है आपने क्या नहीं किया।
कैसे कहे कि था हमसे तुझे वास्ता कोई
तुने तो हमसे आज तक कोई गिला नहीं किया।
©anuragrahi