अब खुशी है न कोई गम रूलाने वाला
हमें तो दिल ओ जां से ठग लिया ठगने वाला।
उनको रूखसत तो किया था मुझे मालूम था
सारा घर ले गया घर छोड़कर जाने वाला।
हम इतने अमीर न थे कि दुबारा घर बना सके
तुफां उड़ा ले गईं हिम्मत जज्बा जो था उड़ाने वाला।
बेरहम जिंदगी से अच्छी भली है ये मौत के फरिश्ते
ले चले हमे भी जहां है ले जाने वाला।
एक मुसाफिर के सफर जैसी है सबकी दुनिया
कोई जल्दी में तो कोई देर में है जाने वाला।
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©anuragrahi
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