मेरा रहगुज़र है आईना तुझे आईने में उतार लू,
मेरे राह में कोई गम न हो तूझे पलको में संवार लू।
मेरा अंग अंग महक उठे ये वादिया चहक उठे,
तू चाँद की है चांदनी मैं चांदनी पसार लू।
मंजिल को खुद खबर न हो कब मिली मंजिल मुझे,
साथ गर तू रहे, ऐसा मैं फतेह करू की ज़िन्दगी संवार लू।
हल-ए-दिल की क्या कहे, तू हाल-ए-दिल से बेख़बर नहीं,
हमसफ़र जब न हो कोई, कैसे वादियों से बहार लू।
कैसे सारा दिन बीता कैसे अब रातें बीती, मुझे कुछ खबर नहीं,
रात दिन तेरे याद में, हर याद को गुजार लू।
©anuragrahi
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