अरे जाग मुसाफर जाग जरा!
कर प्रस्थान लिया किस ओर?2
दिषा न देखी-दषा न देखी!
तु चल दिया सिर तोड़!
कर प्रस्थान------
गणना मे हम अरबों देशी!
पहरावा-खाना-पीना हुआ विदेशी!
तहजीब हमारी दब चुकी है!
न जाने कहां किस गोर!
कर प्रस्थान---------
कहने को कर ली तरक्की!
भ्रष्टाचार भरा है बच्चा-बच्ची!
इमान गुबार सा उड़ता जाए!
ले चले हवा जिस ओर!
कर प्रस्थान--------
झंडीओं मे बँट जाने वालो!
घर को आग लगाने वालो!
मर्यादा भी कोई चीज हुई है!
घर की मर्यादा को मत रोल!
कर प्रस्थान-------
दुनिया का अन्न दाता भारत!
सोने की चिड़िया कहलाता भारत!
द्वीप-द्वीप जा नाक कटाऐं!
करें गुलामी सब्र के चोर!
कर प्रस्थान------
कलम हथ्यार धन सँचालन चाहिए!
कोठी-कारें सुख साधन चाहिए!
एक-एक है बहाना साजी!
हुआ मस्त बदकारी भावबिभोर।
कर प्रस्थान--------
©ramvir
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