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अंधेरा

अंधेरे की ख्वाहिशों में खो गया हूं ,
क्या करूंगा निकल कर ,
जब कुछ रहा ही नहीं ।
निकाला था अपना कीमती वकत,
एक वक्त उनके लिए,
जो कभी अपने थे ही नहीं ।
भूल थी हमरी उन्हें अपना कीमती तोफा समझने की
पर जो पहले था मै अब वो रहा नहीं ।
©sandeepgup