V

अंदर पाये बुढ़ापा

चिलचिलाती जवानी अंदर पाये बुढ़ापा।
खुश होकर गैरों से अपनों पर स्यापा।।
स्यापा पाले देखो जी रिस्की रम।
होकर टल्ली भूले सारे गम।
गम में तो अब हुई जिंदगानी।
हैं नशेबाज की ख़त्म जवानी।।
जवानी जोश वृद्धि की समझ खुराक।
खा रहे असल में मसान की राख।।
राख ऐसी की जीवन को करे खाक।
क्योंकि भर लिया शरीर में तुमने लाख।।
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©vikasgarg