अनकहे जज़्बात......
दिन के उजियारे मे,🌝🌝🌝
वह काली रात - सा ज़िन्दगी जीता रहा!
अपनो के बीच होकर भी ,
अपना हर एक आँसू पिता रहा!
क्या करोगे??????
उसकी मौत पर शोर मचाकर,
वह तो एक मोम था,
जो खुद जलता और खुद ही पिघलता रहा!!!
अगर बची हैं ,सच मे??
इंसानियत जो तेरे मन मे!
हैं धैर्य तुझमे??? 👆🏻👆🏻
ले सको, किसी को शरण में!!
तू ठहर, थोड़ा अपने भागते पैरो के आराम दे,
बैठा उसे, उसके कांपते हाथो को थाम ले!
बरसो से बंधा उसके दर्द का बाँध ,
तेरे एक विश्वास से टूट जाएगा!
दिल हल्का होगा उसका,
एक सुशांत , शायद ज़िन्दगी की जंग जीत पाएगा!!!
ज़िन्दगी की जंग जीत पाएगा!!!
-रितु तिवारी
©ritutiwary
R