बातों में उसकी यादों की बहार है....
मुस्कुराहट का उसकी भीतर में दीदार है.....
लगता है जैसे भीतर के एक कोने में ,
उसका ही अधिकार है
जिसमें उसकी झलक के प्रतिबिंब कई हजार है....
यादों का हर क्षण भीतर में सरोबार है....
चिंता में उसकी मां की आंचल सा प्यार है....
समझाइश में उसकी प्रेम का भंडार है.....
लगता है जैसे वह हमारे जीवन का वह द्वार है .....
जिसके भीतर ही हमारा मुस्कुराता संसार है.....
जीवन में आना उसका हमारे अच्छे कर्मों का संस्कार है इसके लिए मन हमारा ईश्वर का शुक्रगुजार है.....
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