संसार की सजावटो में जुगनू सा बन में घूम आता हूं
अनजाने सफर का मुसाफिर बन ,
कुछ नया हर रोज मैं सिखाता हूं
जब भीतर से खुद को कमजोर पाता हूं
तो इस अनजाने सफर में थोड़ी शांति चाहता हूं
दुनिया के दरमियान से ,
हृदय की निवृत्ति चाहता हूं....
हृदय की निवृत्ति चाहता हूं .....
फिर खुद को खाली कर ,
हवा के संग बादलों की सैर पर जाता हूं
पर कभी -कभी इस कदर थक जाता हूं
कि हृदयाकक्ष के एहसास में शांति की तरंगे जगाता हूं
उस ईश्वर के अहसास को महसूस कर ,
अपने शीर्ष को खुद ही सहलाता हूं
और नमी भरी आंखों से ,
उस दृश्य में खो जाता हूं .....
उस दृश्य में खो जाता हूं.....
©myemotions
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