अंखियां के भाषा काहे समझ नाही पईलू
दिलवा के दरद काहे हमें ऐतना दिहलू।
कौनो प्रित ना बा तोहसे कह देतू हमसे
शायद ऐतना ना तड़पती हम जुदाई के गम से
जिनिगीया हमार तू बेज़ार कई दिहलू
अंखियां के भाषा काहे समझ नाही पईलू
दिलवा के दरद काहे हमें ऐतना दिहलू।
याद हमार तोहके जब जेही दिन आई
फुल के ई सेजिया भी कांट बन जाई
दिल के अरमान हमर निलाम कर दिहलू
अंखियां के भाषा काहे समझ नाही पईलू
दिलवा के दरद काहे हमें ऐतना दिहलू।
पपिहवा के बोलियां अब न तनिको सुहाला
बा करेजवा में तीर चुभल जईसन बुझाला
कोमल कोमल हांथवा से हमार जान ले लिहलू
अंखियां के भाषा काहे समझ नाही पईलू
दिलवा के दरद काहे हमें ऐतना दिहलू
का करी ई रोग नइखे अपना इख्तियार में
ना कबहू बर्बाद होती बेवफ़ाई से प्यार में
रिश्ता ई हमर-आपन शर्मसार कर दिहलू
अंखियां के भाषा काहे समझ नाही पईलू
दिलवा के दरद काहे हमें ऐतना दिहलू
अंखियां के भाषा काहे समझ नाही पईलू
अंखियां के भाषा काहे समझ नाही पईलु।
©anuragrahi
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