V

अनमोल

नाराज होकर फेसबुक से अन्फ्रेंड कर दोगे ,
   डायरी से फाड़ दोगे, ग्रीटिंग्स कार्ड जला दोगे
लेकिन मेरी यादें ?
जानते हो ….
यादें और चुप्पियाँ एक दुसरे के directly proportional होतीं हैं
चुप्पियाँ ..यादों के समन्दर में डुबोती चली जाती हैं 
कहते हैं .. खामोशी और बोलती है …..echo भी करती है .
पगला देती है आदमी को …..
इसलिए शब्दों का और आंसुओं का बाहर निकलना बहुत जरुरी है.
मै बाहर निकल आया हूँ , तुम भी बाहर आ जाओ .
अपने ego के खोल से .
मै भी sorry बोलता हूँ , तुम भी बोलो
….. बोलो , तुम्हारा भी कद ऊंचा हो जाएगा
— अब छोडो भी इन बातों को , गलती किसी की भी हो .. 
     पर ह्त्या तो दोस्ती की हुई न ?
….और हमारी दोस्ती इतने कमजोर धागों से नहीं बंधी है
कि एवीं टूट जाय .
न दोस्ती को एवीं टूटने देंगे… न जिन्दगी को
क्योंकि दोनों अनमोल हैं
🌹🌹🌹
©vikasgarg