यादों के पुराने डिब्बे में से,
मेरा एक पुराना हिस्सा मिला।
जब देखा तो एक " अनमोल दोस्त" मिला,
बचपन के झगडे को याद किया तो तुम्हारा हसता हुआं चहेरा". मिला।
धरती के मिट्टी जैसी हो तुम नरम,
गुस्सा करने पर अग्नि जैसी लगती हो तुम।
बच्चों को जीवन जीने सिखानेवाली "गुरु" हो तुम,
मेरे बचपन से लेकर अंत तक का सहारा हो तुम।
मेरी मुस्कराहट के लिए कुछ भी कर जाओ एसा"वजूद" हों तुम,
में कभी भी देख सकु तेरी आंखों में आंसु।
कभी कभी तुझमें खोजु में अपनी " तस्वीर",
तो कभी तुम सिखाती मुझे दुनिया से लडने की तरीके।
तुम्हारे साथ बिछे हुए हर पल "नूर" बन जाएं,
मेरी ' रुह" को छुने वाला " सितारा" हो तुम।
जिंदा दिल से जिनेवाली "वीरा" हो तुम,
तुम्हारे घर के आशियाना का "दिया" हो तुम।
"बादलों" जैसी तुम्हारी ऊंची उड़ान हो,
जो देखे तुमने सपने सभी " मुकम्मल" हो जाएं।
जो आए कोई मुसीबत तो मैं "ढाल" बन जाऊ,
तुम्हारे हर दर्द मुझसे होकर गुजरे।
"दोस्ती" का "बंधन":हर पल जिंदा रहें,
तेरे मेरे "पागलपन" की सभी यादें तेरे चहरे की "मुस्कराहट" की वजह बनें।
©urvi13
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