1.
उते पांव पसारिए तेते लम्बी दिद
पुरन होए तो भला न होए तो कब्र की निद।।
2.
स्वपन देखन बुरा नहीं स्वपन ही उम्मीद
निद न आवे उ का जाने क्या होली क्या ईद।।
3.
मैं बना इक ढोलकी मारे करे आवाज
जग सुना तो क्या सुना न सुना ईश्वर मेरा कल या आज।।
4.
मोल क्या जानु स्वर्ण हिरा हो व बंग
उम्र बिती मुफलिसी में चढा कांसा न अंग।।
5.
सौ चोट सुनार एक चोट लुहार का
एक चोट गरीबी मारे हजार चोट लुहार का।।
6.
गुत्थी गरीबी सुलझाइके क्या पाओगे पीर
रहा न देने को कोई भी एक आंजर भी नीर।।
7.
बालम घर खुश हो गई बनी सुहागन हीर
बिन व्याही जो रह गई उसकी कैसी तकदीर।।
©anuragrahi
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