V

अनर्थ

एक से एक दुर्घटना हो जाती है जमाने में 
किसी शेर सा कलेजा चाहिए उन्हे सुनने सुनाने मे 
आसान नही हर एक को खुश रख पाना जिंदगी में
कई बार रूह से रूह बदलनी पड़ती है रिश्ते निभाने में 
एक दिन एक आदमी अपना सपना करना चाहता था साकार 
अपनी इच्छा पूरी करने वो लेकर आया घर में कार
जो कई कई दिन यूं ही खड़ी रहती थी घर में बेकार 
क्योंकि साहब तो बाहर रहते थे ओर हफ्ते में एक ही दिन आता है रविवार 
चंद मीलो ही बस चल पायी थी 
पैट्रोल कम लगा था, उससे मंहगी उसकी सफाई थी 
वक्त कम होने की वजह से 
साहब ने बस दो महीने में सिर्फ चालीस किलोमीटर घुमाई थी 
घर में एक बीवी एक बच्चा था 
छोटी उमर का था समझ का थोड़ा कच्चा था 
पढ़ने लिखने मे भी था बहुत होशियार 
मम्मी पापा को बहुत चाहता था, दिल का बिल्कुल सच्चा था 
नादानी की उमर थी एक दिन कार में मार दी उसने चंद खरोंचे
उसके बाप ने देख लिया, बहुत गुस्सा हुआ बदल गई उसकी सोंचे 
आव देखा ना ताव, गुस्सा सिर चढ़ कर बोल रहा था
बेरहम बाप किसी, हथौड़े से अब तो बच्चे के ही हाथ और पैर खोल रहा था 
एक पर एक बच्चे के कोमल हांथो पर उसने किये कई वार 
कंडम हाथ कर दिए, ये निकला उस मारपीट का सार 
गुस्सा खत्म होते ही उसको हुई बच्चे की सोच
बुरी तरह रो रहा था मासूम,
असहनीय दर्द के कारण बेचारे की चीख रही थी चोंच 
जख्मी हालात मे बाप बेटे को लेकर हस्पताल भागा 
तब तक बेहोश हो चुका था मासूम बेकसूर बच्चा अभागा 
होश आते ही उसने सबसे पहले अपने पिता को देखा 
एक प्रश्न किया,क्यूँ आपने मुझ पर अपना हथौड़ा था दागा 
चाह कर भी अपने हाथो को हिला ना पाता था 
तीनो वक्त की रोटी किसी दूसरे के हाथो से खाता था 
और आज भी उस बेरहम पिता के बिना उसका मन नही लगता था 
क्योंकि वह तो सबसे ज्यादा उसी को चाहता था 
सारे,कामो से निबट कर बाप ने एक दिन कार की उस जगह को देखा 
जहां कभी उस मासूम ने बनाई थी कुछ रेखा 
अचरित होकर खून के आंसू रोने लगा 
खड़े खड़े ही अपना असितत्व खोने लगा 
पढ़कर उन चंद खरोंचों को वह अपनी कार भूल गया 
एक एक अक्षर उस पर ऐसा लिखा था,
जैसे भीतर आत्मा तक कोई शूल गया 
समझ गया सारी बात के उस दिन गुस्से के 
आगे सारे जज्बात हारे है 
क्योंकि कार पर लिखा था,
मेरे पापा इस दुनिया मे सबसे प्यारे है 
🌹🌹🌹
©vicky