अनुराग इन से अच्छा तो वो दिलजलों की बस्ती है।
कुछ है जो हम भी उन से किनारा करते हैं
रूखी सूखी खा कर अपना दिन गुजारा करते हैं
बस फक़त इस दिल की तसल्ली के खातिर
बेवफा की गली से फीरा आवारा करते हैं
नज़राने में उसने मुझको दिया है आइना
अब अक्श उसका दिन रात निहारा करतें हैं
दयार-ए-हुस्न में आ कर मैं हो गया तन्हा
मेरे शहर में तो एक दुसरे को दिया सहारा करते हैं
अनुराग इन से अच्छा तो वो दिलजलों की बस्ती है
जहां हर वक्त अब भी जिक्र हमारा करतें हैं।