इनको आती उनको आती सबको आती
अपना गांव, गांव वाला घर
खेत खलिहान, स्कूल के मैदान
ताल तलैया, बरगद की शान
की याद
अपने फ्लैट अपनी कोठियों में बैठे
फुर्सत में आंसू बहाते, यादों में गोते लगाते
लाजमी है,
सुनहरे दिन, सुनहरी यादें
ता-उम्र रह जाते
बनकर मधुर यादों के निशान
पर मुझे नहीं रुलाती ऐसी यादें
क्योंकि मुझे नहीं भाता आज भी
मेरा गांव
डगमगाती पगडंडियों पर
पांव खींचते लोग
विकास की राह पर
फन निकाले
मानसिक विकार से
ग्रसित
नर्क के अहसास के साथ
याद आते
गले लगाकर गला काटते
अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मार
दूसरों को लंगड़ा करते वो लोग
वहां के खेत खलिहान
पीपल श्मशान
ताल तलैया
चबूतरे पर गोल पत्थर से उकेरे गये देव
कुछ भी मुझे किसी
मधुर याद से नहीं जोड़ता
क्योंकि बचपन से
इन परंपराओं से विलगता
अब जोड़ नहीं पाती मुझसे
अपना तारतम्य
वहां वो सुकून नहीं, जो बहुतों का है सौभाग्य
पर मेरा है दुर्भाग्य
Written by and © Krishna
21/01/2k19 09:23hrs
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