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अपने सूरज को जगाओ....

घना अंधेरा हो गया अब उजाले की तलाश है
मेरी कोशिश रंग लाएगी यही तो आस है,
कब तक अंधेरे को सहेंगे
और कब तक अंधेरे में डूबे रहेंगे
अब सूरज बनके निकलेंगे
जीवन में उजालों की सौगातें लाएंगे
बस इतनी ही ख्वाहिश जागी है
जीवन में अब सुरज उगने की तलाश है।
बाहरी दुनिया सुरज की किरणों से चमकेगी
पर मन के अंदर सुरज की किरणों की तलाश है
अब अपना खुशियों से भर जाए आंगन
घोर अंधेरा ढल जाए ऐसा हो जाए जीवन
सारा जहां सुरज की किरणों सा जगमगाए
हर तरफ खुशियां ही खुशियां छाए
इतनी-सी उम्मीद की किरण साथ है
जीवन में अब सुरज उगने की तलाश है।
---✍️ उमेंद्र बिसेन ✍️---


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