प्रेम का सागर या चेतना का चिंतन
प्रीति की गागर या आत्मा का मंथन
ज्ञानियों का गुंथन या गोकुल का ग्वाला
दुष्टों के लिए विष या भक्तों का अमृत प्याला
पृथ्वी का मानव या निर्लिप्त योगेश्वर
चेतना चिंतक या संतृप्त देवेश्वर
जेल में जन्मा या गोकुल का पलना
देवकी की गोदी या यशोदा का ललना
नदियों-सा बहता या सागर-सा गहरा
झरनों-सा झरता या प्रकृति का चेहरा
आत्मतत्व चिंतन या प्राणेश्वर परमात्मा
स्थिर चित्त योगी या यताति सर्वात्मा
कृष्ण तुम पर क्या लिखूं! कितना लिखूं
रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित जितना लिखूं
जन्माष्टमी की शुभकामनाएं
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©vikasgarg
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