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अर्जुनविषादयोग-2

कुरुक्षेत्र में जब अर्जुन ने त्याग दिए धनुष और बाण,
बोले अर्जुन- महापाप मुझसे ना होगा हे अखिलेश सुजान,
राज और सुख लोभ के खातिर, कैसे दू उनको मार,
जीवन जो स्वार्थ भरा, उस जीवन को है धिक्कार,
गुरु द्रोण और भीष्म पितामह अश्वथामा और कर्ण,
इनको मारकर करूँ कैसे नीचता होकर क्षत्रिय वर्ण,
इनका रक्त बहाने से अच्छा दें दू मैं अपने प्राण,
अपना स्वार्थ को पूर्ण करने से पहले त्याग दू मै प्राण,
महापाप मुझसे ना होगा हे अखिलेश सुजान।
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©vikasgarg