V

अश्क

ना जाने क्यों आज फिर से ये अश्क बह निकले,
ना जाने क्यों दूसरे के लिए जान न्यौछावर करने निकले,
ना जाने क्यों आज फिर से ये अश्क बह निकले,
जिन्हें अपना हम समझते थे, वो ही तो पराये निकले,
ना जाने क्यों आज फिर से ये अश्क बह निकले,
जिनके लिए जान लुटाइ, वो ही तो शिकारी निकले,
ना जाने क्यों आज फिर से ये अश्क बह निकले,
जिनके लिए सुख छोड़ा, वही दु:ख का कारण निकले,
ना जाने क्यों आज फिर से ये अश्क बह निकले,
विकास गर्ग
©vicky