कुछ बात हुई उसकी ख़ुद से
कुछ बात जहन मैं आई है
कुछ टूट गया सीने में या
धक्का खाकर आई है
भूल गई खुद को वो या
कुछ भुलाने की कोशिश करके आई है
क्यूं उदास है चेहरा उसका
जो कभी अकेले मे हंसकर आई है
टूट गया सपनों का आशियाना या
टूटा कांच उठकर आई है
बातों से मुझे पका थी
आज ख़ामोशी लेकर आई है
क्या रूठ गई मुझसे वो या
खुद से रूठकर आई है
कह ना सकी जो कहने को आई थी
बोलना सकी वो कुछ भी जो
बोलने को बहुत कुछ लाई थी
क्यूं रोक रखा थे शब्द उसने
क्यूं ख़ामोशी लेकर आई है
क्या बात हुई उसकी उससे
या लड़के किसी से आई है
पूछा मैने तो चुप्पी मुझे दिखाती है
बोल ना सकी वो जो आंखे उसकी बताती हैं।
©shivanii
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