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अवस्था

एक बूढ़ा व्यक्ति सीढ़ियों पर बैठा बैठा ना जाने कहां खोया हुआ था
शायद जवानी में उसने कोई गहरा बीज बोया हुआ था
वो अपने पुरानी यादों के लम्हों के दिए को उजागर कर रहा था
मानो उसने अपने बीते पलों में कुछ बुरा करा या सहा था उसे याद आ रहा था दिलों को जख्मों से भर देने वाला वो किस्सा
उसे पता था कि यह उसकी जिंदगी का था सबसे बुरा हिस्सा
यादों के पंखों मैं उड़ान भरते हुए उसे याद आया वो दिन जब एक जवान युवक एक बूढ़ा पिता पिता घर में अकेले थे
युवक पिता की ओर संकोच और डर से बढ़ रहा था शायद उसके भाव मेले थे
युवक ने कुछ हिम्मत जुटाते हुए पिता को बोला सुनिए आपका सामान बांध लीजिए
साथ ही में अपनी अलमारी की चाबी और जमीन के कागजात मुझे दीजिए
पिता बोले-बेटा समान बांधलो और यह कागजात की बात क्या है तुम्हारा विचार
पिता के यह शब्द कर रहे थे बेटे पर अंदरूनी वार
बेटा बोला- पिताजी मुझे अपने काम से दो-तीन दिन के लिए बाहर जाना है जहां पड़ेगी आपके कागजात की जरूरत
आप अकेले यहां क्या करोगे इसलिए मैंने अपने दोस्त को आपके ठहरने की व्यवस्था के लिए भिजवा दिया है खत
बूढ़ा पिता बिना कुछ बोले अपना सामान बांधने लगा तभी उस पिता के मन में एक प्रश्न जगा
पिता बोला- बेटा तुम दो-तीन दिन में तो आ जाओगे
तभी बेटा चिढ़ाते हुए बोला की आप दो-तीन दिन में मुझे अपने पास ही पाओगे
बेटे ने अपना दो-तीन दिन का सामान उठाया और चल लिया पिता के उस भारी बैग पर ध्यान देकर भी अनदेखा कर दिया
बेटा जोर जोर से गुस्से में गाड़ी का हॉर्न बजा रहा था
बेटा बोला -पिताजी कब से आपको बुला रहा हूं आपका ध्यान कहां था
पिता ने अपने लड़खड़ाते हुई आवाज में बोला वह बेटा मेरा बैग भारी था
पिता के बोलने पर भी बेटा का गुस्सा जारी था
पिता से बात ना करने की इच्छा जताते हुए उसने अपने गाने की आवाज को तेज कर दिया
पिता तो पिता होता है उसने इस बात पर इतना ध्यान नहीं दिया
कुछ घंटों बाद एक बड़े से घर के आगे बेटे ने गाड़ी को रोका
बेटा बोला -यह क्या 1:30 हो गए पिताजी मुझे जाना होगा यह बोलकर बेटा चौका

"पार्ट 2 will be come soon"
vinita
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