I

azaadi

आज़ादी
- विनय श्रेष्ठ
कितनी गोलियाँ चली ,
कितनी जानें गई ,
पाने को आजादी।
कितनी क्रांतियाँ हुई ,
कितनी फांसियाँ हुई ,
पाने को आजादी।
कहा सुभाष ने -
'खून दो मुझको
मैं तुम्हें आजादी दूंगा।'
बापू बोले -
' करो या मरो ,
मैं अंग्रेजों से निपटूँगा। '
तिलक का दावा था-'स्वराज पर जन्मसिद्ध अधिकार हमारा।'
चारों तरफ था-
'भारत छोड़ो का नारा।'
कितनों ने सुहाग खोये ,
कितने ही अनाथ हुए ,
पाने को आजादी। कितनी गोदें खाली हुई ,
कितनों की बदहाली हुई ,
पाने को आजादी।
आजादी की खातिर,
जनता ने आवाज उठाई।
उठाया बीड़ा ऐसा ,
अँग्रेजों की शामत आई।
हँसते-हँंसते वीरों ने ,
मौत को गले लगाया।
भारत माँ को अँग्रेजों की
जंजीर से मुक्त कराया।
कितनी दुनिया लूटी ,
कितने घर उजड़े ,
पाने को आजादी।
कितने सत्याग्रह हुए ,
कितने आंदोलन हुए ,
पाने को आजादी।
©itsmevinay